गौतम पात्र
नमस्कार ! मित्रो मेरा नाम है गौतम पात्र | स्वागत है आप सभी का मेरे वेबसाइट "पयाम " में , मै आप सभी को धन्यवाद करता हु की आप सभी ने अपने जीवन का कुछ कीमती समय निकाला और यहाँ आप मेरी गजलें और नज्में पढने आये , तो जैसा की मैंने आपको अपने परिचय में बताया मेरा नाम गौतम पात्र है और मै फिलहाल दिल्ली में रहता हु परन्तु मेरा जन्म 6 अप्रैल 2000 को ओड़िसा में हुआ था |
दिल्ली में ही मैंने अभी तक 12वी तक पूरी पढाई की है | एक सच बात ये है की मै पढाई में बिलकुल भी अच्छा नहीं हु और मुझे पढने का बिलकुल भी शौक नहीं था |
यहाँ तक की मेरे कक्षा में अंक बहुत ही कम आया करते थे परन्तु स्कूल में किताबे और परीक्षायो से सख्त नफरत और आलस करने वाला गौतम कलम से बेहद प्रेम करता है , वैसे अगर देखा जाए तो मै हिंदी भाषा में भी कोई खास उपाधि नहीं ले पाया हु और मुझे भी हिंदी उतनी ही आती है जितनी किसी आम बोल चाल में आपको और सभी लोगो को | मुझे लिखने का बहुत शौक है जिसकी महक 9वी कक्षा से ही आनी शुरू हो गयी थी वो बात अलग थी की मै हिंदी विषय में कोई महारती नहीं था और ना ही ज्ञानी था परन्तु मुझे लिखना अच्छा लगता था , एक भाषा जो मै बोल सकता हु ,लिख सकता हु , थोडा सही , थोडा गलत पर जिस भाषा को मै कई वर्षो से आम बोलचाल में उपयोग करता था उसमे अपने भावनायो को लिखना और वक्त के पुराने पन्नो को खोलना मुझे अच्छा लगता है , यही वजह रही की मैंने लिखना चालू किया और मै बहुत सारे गीत लिखने लगा , शब्दों और वाक्यों के साथ खेलने लगा , व्याकरण मुझे उतना नहीं आता है , जो हिंदी बोलता हु वही लिखता हु बस सजावट करके , वक्त के साथ मैंने कई गीत और कवितायेँ लिखी है बस फर्क इतना है की मै 12वी पास हु , यानी मेरे पास कोई डिग्री नहीं है हिंदी में तो ज़ाहिर सी बात है अभी मेरी औकात भी मेरे हाथ नहीं आई है , मज़ाक कर रहा हु , मुझे बस लिखना पसंद है , मैंने बाद में पढना भी शुरू किया , किताबें मेरे हाथो में ना होने से , मै ऑनलाइन फ्री गजले और नज्मे पढने लगा , सच कहूँ तो पढना ही सबसे बड़ा मुश्किल काम था मेरे लिए पर मैंने फिर पढना शुरू किया क्युकी मै हिंदी या उर्दू का ज्ञान से भरा सागर तो नहीं हु और मुझे शब्दों और भाषा का एक आम नागरिक की तरह ही ज्ञान था जिसे मैंने थोडा बढाने के लिए कुछ प्रिसद्ध लेखको की कविता , गजले , नज्मे पढ़ी , मै जानता हु सख्या में मुझे नाम भी याद नही की आखिर क्या पढ़ी परन्तु जब मौका मिलता मै कुछ ना कुछ पढ़ लेता और सिखने की चाह रहती की मै अपनी ज़बान को खुबसूरत बना सकू , मै अभी भी सिख रहा हु , मुझे उर्दू भी नहीं आती है , मैंने जो भी शब्द सीखे है वो सभी गजलो , नज्मो और ऑनलाइन सर्च करके सिखा है , तो दोस्तों मै हमेशा कुछ नया लिखने की चाह में आगे रहता हु , भले ही मेरे दिमाग में कोई ज्ञान का सागर नहीं हो और मै चीज़े भूल जाता हु परन्तु जो लिखने का आनंद है मै उसे छोड़ना नहीं चाहता और यही वजह है की मै कोशिश कर रहा हु लिखने की , रास्ते तभी खुबसूरत बनते है जब चलने वाला उन कमियों को पहचाने , मै भी सिख रहा हु और लिख रहा हु , मैंने अपने इस वेबसाइट में काफी नए गजले और नज्मे लिखी है , जो एकदम ओरिजिनल है और मेरे द्वारा लिखी गयी है , मै उम्मीद करता हु आप सभी को मेरे लिखे ये विचार पसंद आ रहे होंगे और आप लोग भी कुछ सिख रहे होंगे जैसे मै खुद सिख रहा हु , मुझे उम्मीद है आप सभी मुझे और अच्छा लिखने की प्रेरणा देंगे और इस वेबसाइट को साथ मिलकर एक ज्ञान का भण्डार बनाने में इसे पढ़कर सहयोग करेंगे |
धनयवाद
- गौतम पात्र

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