इबारत

                                       





इबारत


देखने से ही हर विचार में केवल यौन क्रिया हो ऐसा मिजाज़ कर देगा ,
चरम आनंद के इस कुछ घड़ियों का इबारत हताश कर देगा 

रजा से खुलती है हदे , जीर्ण शीर्ण देखती आखें , फिर यही आएँगी ऐसा मेराज कर देगा,
अंतरजाल में तरजीह सिर्फ इसकी होगी , इस चस्के का इबारत विरोधाभास कर देगा ,

एक शब्द के मालूम होने से , सहवास बेचती पण्यशाला जैसे वैसा ही बनने पर नवाज़ कर देगा 
इतनी उत्तेजना से महरूम नहीं थे ,देखते रहने की इबारत जैसे मौज माज कर देगा 

गुप्तांग का फर्ज़िपना , स्त्री-पुरुष का वहशीपना , देखने वालो  पे गहरा प्रभाव कर देगा ,
हर काम में विराम होगा , मन में एक  दरिंदा  हर किसी की चैल के पीछे का निरावरण देखेगा 

जननांग को शाही थाली में परोसने वाले नट , ये जाली वासना सबकुछ मुगालता कर देगा ,
नहीं चाहोगे ये सब सोचना , कीचड़ से निकला इबारत देखने के लिए नया जवाब कर देगा 

ना देखो ये  सहमती से होने वाले समागम , खरीदी हुई करवटों से हर चैन का दाह कर देगा 
कोशिश करोगे तो धीरे धीरे ख़त्म होगी  , अच्छी सोच का इबारत यही से निर्वाह कर देगा 

                                                                     - गौतम पात्र 



                                   
                                          गौतम पात्र 





टिप्पणियाँ