मुरव्वत

                             


        





 मुरव्वत

कुछ धुप निकल रही है अगर पिंजरों से सही सलामत आने दो नाजायज़ तो तकलीफे होती है , कदर करो, मुरव्वत आने दो जिस्म से पोशाक उतरे की बाज़ार बन गए , जीस्त जो कोख से निकले ,मदद करो ,शक नहीं, सहमत आने दो दरवाजे पर रुके रहे और बिस्तरों से खर्च उठा लिया , नन्हा शिक्षा लेने आया,शिक्षा दो , उसकी हिम्मत आने दो रात के अँधेरे बहुत भारी होते है लेकिन इल्जामो से हालात ठीक नहीं होते , नाज़ुक उम्र चरित्रहीन कैसे हो गए , बराबर का बचपन दो , परछाई पे मरम्मत आने दो लाचार थी उसकी ज़रूरते , हसने वाले घिनौना बोलकर चले गए , जब पैर निकल रहे है इज्ज़तदार और बड़ी मंजिलो के रास्तों पर , शाबाशी दो , हसरत आने दो थूक थूक कर थूक दिया हर तरफ से उनको , अब अपनी मर्ज़ी से मिसाल बन रहे है , अब तो बरकत आने दो माँ ने जो किया, सो किया लेकिन हर कमाई कुर्बान दिया था , वैसी ही सारी उसकी नस्ल होगी , अपमान मत करो , आगे आने दो नियम कायदे कोई अपने ज़मीर के किराये पर नहीं रखता , ए समाज दर्शक ना हो , उठायो ज़रा कुछ गरीबी या सहयोग की फितरत आने दो

- गौतम पात्र

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                                   गौतम पात्र

                                   



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