शिफ़ा

                                         





शिफ़ा


अक्सर लोग कितना बुरा बोल जाते है किसी एक की तरफदारी में ,
क्या लगता है इतनी बुराई से किसी की इज्ज़त कभी शिफा हो पाएगी 

अक्सर लोग कितनी बुराई कर जाते है सही गलत की होश्यारी में ,
क्या लगता है इतने इल्जामो से किसी की गिरती अच्छाई कभी शिफा हो पाएगी 

सभी काम करते है लेकिन एकाध गलतियों से शक हो जाता है इमानदारी में ,
क्या लगता है इन चुगलियों से किसी की हुनर कभी शिफा हो पाएगी 

कुछ ग्राहक भुगतान करते है सामान का पर आपकी कामयाबी में ,
क्या लगता है इन घमंडियों से किसी की मेहनत कभी शिफा हो पाएगी 


गालियाँ देना , चप्पल की मैल समझना , सब अपनी अपनी उगलियाँ रख देते है उधारी में ,
क्या लगता है इन तमाचो  से किसी की  तकलीफे कभी शिफा हो पाएगी 


किसी को प्यार करना , कुछ किसी को कुछ नहीं समझना ,
फैसले सुना देते है हवाबाजी में ,
क्या लगता है एक साथ ये आवाज गुस्सा दिखाएगी तो किसी की ज़िन्दगी कभी शिफा हो पाएगी 


                                        - गौतम पात्र 

                                      
                                           
                                                  गौतम पात्र 





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