पैकार

                                         


    





पैकार


अहंकार कितना ठेस पहुचाया तुमने इस बूढ़े रिश्तों की गरिमा को ,
पैकार करते करते बैठ जाओगे परन्तु ज़ख़्मी नहीं कर पाओगे हमारी महिमा को ,


छिनने वालों गुसपैठ कैसे करोगे ,धोखा नही दे सकते इस भावनाओ की सीमा को 
पैकार करते करते ज़ुल्म बढाओगे परन्तु तुम दखल नहीं दे पाओगे हमारे  दायमा को 


पैसे तो बस एक माध्यम है खून पसीना डलता है तो हर एक इट सिचता है ,
पैकार करते करते  बाहर कर दोगे परन्तु नहीं हटा सकते इस घर से मेरे नाम को 


हमने अपने ज़ख्म खुले छोड़े थे तो तेरे हाथो के चोट ठीक हो पाए है  ,
पैकार करते करते उन्ही हाथो से खून कर बैठोगे परन्तु  तारे नहीं निकाल सकते तुम ,कितना भी कोस लो आसमान को 



कौन मालूम कर सकता है की किस की गोद में आतंक पनाह लेता है ,
पैकार करते करते  भेज दो वृद्ध आश्रम हमे , तुम्हारे बचपन से ही देखते आ रहे है ऐसे अपमान तो 


जन्म देने वाले है रहम नहीं चाहते ,मुनासिब हो तो तेरा कोई दाना पानी ना लें ,
पैकार करते करते हार नही मानेंगे , नहीं देख पाओगे दो बुढो के भीतर के जवान को 


शिकायत क्या करें ,तू कल को प्यार दे ,  घर का हर  कोना भी सुकून है 
पैकार करते करते सुधर जाओ ,ले चलो अगर ऐसा कोई पुलिस थाना हो 


मौत तो आएगी ये वक्त  का नियम है ,उम्र का सितम है 
बूढ़े माँ बाप को जितना भी सताओ ,कुछ भी नही बचता फिर चाहे क्यों ना ये तुम्हारा अभिमान हो 



                                                   - गौतम पात्र 





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Tuesday, 22 September 2020 (IST)
f-1:57 am
Tuesday, 22 September 2020 (IST)



                                   

                                           गौतम पात्र 






















































































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