ढ़ेरों किताबें

                               


      




ढ़ेरों किताबें




ढेरो किताबें ,पढने का मालिक कौन है ,
अपने अपने ख्याल , उनमे जो कहानी है उसका क्या 

पीछे का लिखा ,पढ़ लिया किसने लिखा 
अपनी अपनी जगह , उनमे जो भरा है उनका क्या 

मांगे कभी दोस्तों से मांग लिया ,
अपनी अपनी पसंद , लौटाया वैसा का वैसा होगा क्या 

कुछ तालियाँ संभाल कर रख ली , बाहर भी निकलो ,
किताबों में लिखे हुए थोडा सा  नहीं अपनाओगे क्या ,

पढने में दर्द है की हर्ज़ है ,लगता बहुत संघर्ष है 
कटे हुए पतंग कही भी गिर जायेंगी , कमज़ोर होना है क्या 

दिमाग है सबके थोड़े थोड़े फैसले में से अपना फैसला निकालेगा  ,
थोड़ी गहरी हवा तेज़ हो तो ज्ञान की बत्ती बुझ जाए फिर क्या


ज़रूरी है नहाना हर रोज पढना कुछ पुराना ,
गतिविधि बढती है फिर और क्या ,बढ़ नहीं जायेगी क्या 

                                                           - गौतम पात्र 



s- 08/09/2020 00:55
f- 1:33 am
Tuesday, 8 September 2020 (IST)









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